Archive for October, 2015

संगीत के सरताज़ #शंकरजयकिशन Sangeet ke Sartaaz #ShankarJaikishan

Written by

Shri Shyam Shankar Sharma

फ़िल्म जगत में पूरे 2 दशक यानी बीस साल (1950-70) की अवधि शंकर जयकिशन के नाम रही।यह वो दौर था जब उनके संगीत से सजी हर फ़िल्म का हर गीत हिट हो जाता था।मन्ना डे कहते थे, “उनके पास हिट धुनों की एक जादुई पुड़ियां थी, जिसमे से बराबर एक से बढ़कर एक हिट गाने श्रोताओ को देते रहते थे।आज के संगीतकार तो एक फ़िल्म में किसी तरह एक हिट गाना देकर अपने आपको धन्य समझने लगते है।मगर उनके लिए यह एक मामूली बात थी।वे लगातार श्रेष्ठ सृजन करते रहे 1955 मे मैंने उनके लिए सीमा फ़िल्म का एक गीत..”तू प्यार का सागर है”..गाया था।इसके बाद उनके लिए मैंने जो भी गीत गाये, सारे के सारे जबरदस्त हिट रहे थे इस संगीतकार जोड़ी के बारे में यह बात भी मशहूर थी कि उनके पास हिट गानो का खजाना था,जिससे एक से बढ़कर एक हिट गीत निकले पर उनकी गुणवत्ता पर कोई फर्क नहीं पड़ा।विपिन रेशमिया लिखते है वे लीजेंड्स थे,आज के संगीतकार तो कोशिश ही नहीं करते?वे पहले संगीतकार थे।” जिन्होंने म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट्स का उपयोग बड़े पैमाने पर किया था. पियानो,आकार्डियन, मेंडोलिन,ओ बो.ड्रम्पेट आदि देसी विदेशी साजो का उन्होंने सटीक तालमेल बिठाया। साज़ बजाने वालोँ के मामले मे कोई कमी सख्त नापसंद थी। गायन के मामले मे भी वे हठधर्मी थे। मुकेश ,राज कपूर की आवाज थे पर इस जोड़ीं ने जरुरत पड़ने पर राजजी के कई गाने मन्नाजी से गवाएं।बाद में घोर आलोचकों ने भी यह कबूल किया की राजजी की शैली को मन्ना की आवाज ज्यादा मुफीद लगती है।इसी तरह लताजी से उन्होंने सर्वाधिक हिट गाने गवाये,पर आशाजी का भी बहुत सार्थक उपयोग किया।उस दौर के सारे नामचीन गायकों हेमन्त कुमार,तलत महमूद,रफ़ी,किशोर आदि का उन्होंने सदुपयोग किया।मृत्यु से कुछ दिन पहले हेमंत कुमार ने एक मुलाकात में उनके सम्मान में कहा “वो तो जीनियस छिलो अर्थात वो तो जिनियस है।आम धारणा है की RK की फ़िल्मो मे ही इस जोड़ी का हिट संगीत आया यह निराधार है,उस खेमे के वो जरूर थे पर इस भ्रम को उन्होंने बार बार तोड़ा, गलत सिद्ध किया,वो किसी एक खेमे के मोहताज नहीं थे।उस दौर के सारे नामचीन फ़िल्म मेकर्स के साथ काम किया।अमूमन यह कहा जाता है कि यह जोड़ी क्लासिक रागों से बचती है पर बसंत बहार,आम्रपाली,सीमा,साँझ और सवेरा,दिल एक मंदिर,तीसरी कसम,मेरे हज़ूर जैसी कई फ़िल्मो में शुद्ध क्लासिक रागों पर आधारित गानो की रचना कर उन्होंने सबका मुंह बंद कर दिया।1947 में हैदराबाद से आये शंकरजी और गुजरात से आये गुजु भाई जयकिशन जी के बाहरी व्यक्तित्व सर्वथा जुदा थे।पर संगीत ने उन्हें एकाकार कर दिया। RK की पहली फ़िल्म आग(1948) मे ये दोनों संगीतकार राम गांगुली के सहायक थे।पर राजजी की दूसरी फ़िल्म बरसात(1949) मे उन्होंने स्वतंत्र संगीत रचना की। यह साथ जयकिशनजी की मृत्यु तक बदस्तूर कायम रहा।1966 में अपने अनन्य मित्र गीतकार शैलेन्द्र की असामयिक मौत के बाद शंकर जी बेहद टूट गए थे।1971 मे जयकिशन के असामयिक निधन से शंकरजी का सृजन भी मानो बिखरने लगा था पर दृढ़ संकल्प के साथ शंकरजी ने कई हिट गीतों का निर्माण किया जिसमे सोहन लाल कँवर का उन्हें सच्चा साथ मिला।1975 में उन्होंने सन्यासी में हिट संगीत दिया और शंकर जयकिशन जोड़ी का नाम 1984 तक कायम रखा और इसी वर्ष ख़ामोशी के साथ शंकरजी ने सांसो के साथ संसार से विदा ली।इस जोड़ी ने कुल 8 बार फ़िल्म फेयर अवार्ड प्राप्त किये,सर्वप्रथम पदमश्री से सम्मानित किये गए।आज के कुछ संगीतकार देर सवेर भले ही उतने अवार्ड्स प्राप्त कर ले पर याद रखे कि यह अवार्ड्स उन्हें महान संगीतकारों के दौर मे मिले थे जिनका कोई सानी नहीं था।शंकर जयकिशन जैसी कर्णप्रियता लाना आज के संगीतकारों के वश की बात नहीं है।आज संगीत युगंधर शंकरजी की जन्म तिथि है में अपना यह आलेख पुष्प उन्हें सादर समर्पित करता हूँ।

कुछ विशेष टिप्पणियां दूसरे पाठकों द्वारा जो शंकर जयकिशन के मुरीद भी हैं

Dave Vijay  लिखते हैं कि :

शंकरजी (जय किशन) दोनों के बारे में कुछ भी मैं लिखू तो मैं छोटा पड़ जाऊंगा। मेरे अज़ीज़ मित्र Sss ने जो भी लिखा स्त प्रतिसत सच ही लिखा है।
आज मैं शंकरजी के बारे में कुछ लिखा रहा हु। जो मेरे हिसाब से सही है। जब जयकिशन जी का निधन हुआ तब शंकर जी अकेले पड गए थे। अचानक जय साब के जानेसे उनके ऊपर एक पहाड़ टूट पड़ा हो ऐसा वोह महसूस कर रहे थे।लेकिन ये आदमी हार माननेवालो में से नहीं था। अपने आप को उन्हों ने संभाल लिया और शंकर जयकिशन के नाम से ही म्यूजिक देना सुरु कर दिया। जब दोनों साथ में थे तब काम के ज्यादा भरण की वजह से दोनों अलग अलग फिल्मो का कार्यभार संभाल ने लगे थे। जरुरत पड़ने पर एक दूसरे के साथ स्स्लाह मशवरा करके काम करते थे। जय साब के निधन के बाद शंकरजी ने न केवल जय साब की फिल्मो का म्यूजिक पूरा किया लेकिन बाद में उन्होंने करीब 50 फिल्मो में और भी म्यूजिक दिया और शंकर जयकिशन के सूरज को अस्त नहीं होने दिया। और कई संगीतकार फ़िल्मी दुनिया में जोडियो में थे लेकिन ये कारनामा सिर्फ शंकरजी ने ही कर दिखाया। बाकी के संगीत कार पूरी तरह से विफल हो गए है। जब शंकरजी का निधन हुआ तब भी उनके पास 2 फिल्मो का करार था। ये इन्शान ने मौत को भी अपने पर हावी नहीं होने दिया मरते दम तक संगीत की साधना करते रहे और S J के नाम को कायम रखा। जय हो अमर S J की। 
राजजी के कैम्प से निकल ने के बाद शंकरजी अकेले हो गए थे। फिर भी ईमारत भलेही पुराणी थी लेकिन बुनियाद मजबूत थी उन्होंने अपने आप को संभाला और अन्पने काम में जुड़ गए । सोहनलाल कंवरजी राजेंद्र भाटियाजी और कुछ अन्या डायरेक्टर्स के साथ उन्होंने काम किया और सन्यासी दो जूथ दुनियादारी जंगल में मंगल आज की ताज़ा खबर नारी । हा दो और डायरेक्टर्स paacchi और आत्मरामजी के साथ भी काम किया। इत का जवाब पत्थर से इंटरनेशनल croook साजिस आत्माराम जैसी हिट्स फिल्मो में म्यूजिक दिया। अंत तक S J के बैनर के परचम को लहेराते रहे। धन्यवाद। S J की जय हो।

Shiv Shanker Gahlot  का कहना है कि :

बहुत सुन्दर लेख । शंकर जी की गाथा अनन्त है और उनके चाहने वाले पढ़ पढ़ कर आनन्दित रहते हैं ।

Raajeev Shrivaastav ने अपनी प्रतिक्रिया यों व्यक्त की :

शंकर-जयकिशन !
हिन्दुस्तानी सिने गीत-संगीत को भारत सहित विश्व के ढेरों देशों के जन मानस के ह्रदय से जोड़ने का प्रथम कार्य करने वाले संगीतकार जोड़े शंकर और जयकिशन वास्तव में सिने संगीत साम्राज्य के अब तक के एक मात्र ‘चक्रवर्ती सम्राट’ हैं.
शंकर-जयकिशन के सुरीले गीत-संगीत के ‘अश्वमेघ यज्ञ’ का अश्व जब भारत की सीमा लाँघ कर सुदूर तब के सोवियत रूस की धरती का स्पर्श करता हुआ अमरीका, कनाडा, जर्मनी, फ़्रांस, चीन सहित दक्षिण-पूर्व एशियाई के अनेकों देशों के व्योम की यात्रा करता हुआ इस सृष्टि के दशों दिशाओं में अपने कालजयी सरगम की पताका फहरा रहा था तब किसी भी राष्ट्र का गीत-संगीत उनके सुर-संग्राम को चुनौती देने की स्थिति में नहीं था. आज भी ‘आवारा हूँ’ और ‘मेरा जूता है जापानी’ जैसे उनके अनेकों गीतों की पुनरावृत्ति विश्व के कई देशों की वर्तमान पीढ़ी के अधरों पर सहज रूप से थिरक रही है. भारत के इस एकमात्र सर्वाधिक प्रतिभावान एवं प्रयोगवादी संगीतकार ने पाश्चात्य संगीत वाद्य यन्त्रों का जिस मनोयोग से भारतीयकरण किया उससे तब तो लोग अचम्भित हुए ही थे और आज भी अँग्रेज सहित पश्चिम के सभी संगीतकार उनके वाद्ययन्त्रों पर भारतीय धुनों को सजते हुए देख-सुन कर आश्चर्य से भर उठते हैं.
भारत के प्रथम और अब तक के एकमात्र ‘धर्म निरपेक्ष’ (सेक्युलर) संगीतकार शंकर-जयकिशन ही हैं. इस सम्बन्ध में अंग्रेजी में लिखे मेरे पूर्व के आलेख को आप इस लिंक पर पढ़ सकते हैं —-https://www.facebook.com/notes/raajeev-shrivaastav/shanker-jaikishan-an-indian-musical-secular-face-the-emperor-of-filmfare/2149884102731   जिस अवधि (दौर) में हिन्दी सिने संगीत जगत में आर.के. कैम्प से जन्में और जीवन पर्यन्त इन्हीं के संग जुड़े रहने के शंकर-जयकिशन के संकल्प के समानान्तर जब संगीतकार नौशाद और सचिनदेव बर्मन ने देखा कि शंकर-जयकिशन गायक मुकेश के संग जुड़ कर राजकपूर के लिए धुनें सृजित कर रहे हैं तो पूर्ण सत्य को देखे-परखे बिना ही नौशाद ने मु. रफ़ी को और एस.डी. बर्मन ने किशोर कुमार को अपना स्थायी गायक (पुरुष स्वर) बना लिया. सिनेमा और संगीत के इतिहासवेत्ता (Film & Music Historian) के रूप में अपने शोध एवं अध्यन से मेरा आंकलन तथा निष्कर्ष यह रहा है कि ऐसा कर के नौशाद और एस.डी. बर्मन ने स्वयं अपना और सिने संगीत का अहित किया है. इन दोनों ही संगीतकारों के कई-कई गीत ऐसे हैं जिनमें क्रमशः रफ़ी और किशोर के स्थान पर वे अन्य दूसरे गायक से उसे और प्रभावी रूप में प्रस्तुत कर सकते थे. यदि ये शंकर-जयकिशन की तरह उदारवादी वृत्ति के होते तो सम्भवतः धर्म निरपेक्ष संगीतकारों में इनका भी नाम जुड़ जाता. आवश्यकता पड़ने पर शंकर-जयकिशन ने राजकपूर के लिए मुकेश के स्थान पर मन्ना डे से गवाया है तथा गीतों की प्रकृति के अनुरूप इस जोड़े ने मु. रफ़ी और किशोर कुमार से गीत गवाने में कभी भी परहेज नहीं किया. यहाँ तक की तलत महमूद, हेमन्त कुमार, महेन्द्र कपूर, सुबीर सेन, शमशाद बेग़म, आशा भोसले, शारदा, सुमन कल्याणपुर, मुबारक बेग़म के ढेरों श्रेष्ठ गीत इन्हीं के संगीतबद्ध किये हुए हैं. मु. रफ़ी के गायन में चमत्कारिक सुरीलेपन और ‘याहू’ सरीखा उन्मुक्त प्रभाव उत्पन्न करने का श्रेय तथा किशोर कुमार के ‘उड्लई’ शैली को नूतन प्रभाव देने का श्रेय शंकर-जयकिशन को ही जाता है. ऐसा शंकर-जयकिशन के ‘धर्म निरपेक्ष’ (Secular) उदारवादी मनोवृत्ति के कारण ही सम्भव हो सका था.
हाँ, भारत का ‘ऑस्कर’ कहा जाने वाला ‘फ़िल्मफ़ेयर’ पुरस्कार किसी एक श्रेणी और विधा में सर्वाधिक बार अर्जित करने वाले संगीतकार भी शंकर-जयकिशन ही तो हैं. सुरों के अद्भुत चितेरे इस संगीतकार की अपूर्व प्रेरणा ने ही मुझे उन पर एक कविता रचने का सौभाग्य प्रदान किया जिसे मैंने सर्वप्रथम भाई Sudarshan Pandey जी के संग साझा किया था. शंकर-जयकिशन पर लिखी गयी मेरी कविता जो उन्हीं के द्वारा रची गयी एक धुन पर आधारित है को आप सभी इस लिंक पर पढ़ सकते हैं —- https://www.facebook.com/notes/raajeev-shrivaastav/%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%97%E0%A4%AE-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A7%E0%A4%95-%E0%A4%B6%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A4%B0-%E0%A4%9C%E0%A4%AF%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A4%A8-sargam-saadhak-shankar-jaikishan-/10202758399937174
आज यह सिद्ध हो चुका है की महान शंकर-जयकिशन विगत, वर्तमान और आगत के एकमात्र स्वयम्भू कालजयी संगीतकार हैं.
मंगल कामनाएं !
डॉ. राजीव श्रीवास्तव Dr Raajeev Shrivaastav

Shyam Shankar Sharma राजीव श्रीवास्तव जी के पोस्ट पर उत्तर देते हुये कहते हैं:

परम आदरणीय सर राजीव श्रीवास्तव जी,आपकी कलम में जादू है जो ह्रदय को स्पर्श करती है।आलेख का उत्तर आलेख वो भी प्रश्नो से परे।आपने जिस खूबी से SJ को सम्मान दिया है वो अप्रितम है।आज मे सांय 4 बजे दूरदर्शन के सांध्य कालीन कार्यक्रम मे शंकरजी के ऊपर बनाये कार्यक्रम को देख रहा था,तो बरबस आपकी याद आ गयी। सुरेश पुजारी , सिने इतिहासकार वही कुछ बता रहे थे जो आपने अपने आलेख मे प्रस्तुत किया है।शंकर जय किशन के बारे मे जो शब्द रचना सच्चाई से प्रस्तुत की है उससे मे अभिभूत हूँ और स्वयं को धन्य मानता हूँ कि इतने बड़े सिने इतिहासकार ने मेरी पोस्ट को मान दिया जो आपकी कविता का चरित्र उजागर करता है और आपकी विशालता को दर्शाता है।मैने अपने सम्पूर्ण जीवन मे हिंदी मे शंकर जयकिशन के ऊपर लिखे इतने उत्कृष्ठ आलेख को नहीं पड़ा।मै आपके लिंक्स पर जाकर जरूर लाभ प्राप्त करूँगा। एक मात्र धर्म निर्परक्ष संगीतकार शंकर जयकिशन को बताकर आपने उनकी खूबियों का सारांश लिख दिया।आपने सत्य ही लिखा की महान शंकर जयकिशन विगत, वर्तमान और आगत के एक मात्र कालजयी संगीतकार है। मेरा सादर प्रणाम। लिंक पर तो मे जाऊंगा पर जो कविता आपने सुदर्शनजी के संग साँझा की थी उसे मेरी इस पोस्ट पर प्रस्तुत कर मुझे कृतार्थ करे।पुनः नमन।

DrArdhaangini Kulshreshth का कहना है कि :

श्रीमान श्याम शंकर शर्मा जी का महान संगीतकार शंकर-जयकिशन पर सारगर्भित आलेख अत्यन्त ही तथ्यपरक एवं सूचनापूर्ण लगा. बधाई !
सम्भवतः आपके ही प्रस्तुत आलेख को सुरीला विस्तार देते हुए Dr Raajeev Shrivaastavसर ने ऊपर अपना जो लघु शोध प्रबन्ध प्रस्तुत किया है वह अद्भुत है.
हिन्दी सिनेमा के अब तक के सर्वश्रेष्ठ संगीतकार युगल शंकर-जयकिशन के कृतित्व का इतना गहन शोधपूर्ण अध्यन जिस प्रकार सिने संगीत के इतिहासवेत्ता के रूप में Dr Raajeev Shrivaastav सर ने प्रस्तुत किया है वह उन सब के लिए एक आँखे खोलने जैसा उपक्रम है. जो तथाकथित संगीत के महाग्यानी लोग अब तक शंकर-जयकिशन की अद्भुत प्रतिभा को विस्मृत करते रहे हैं उनके लिए इस आलेख से वृहद् सत्य का और क्या साक्ष्य हो सकता है ?
धर्म निरपेक्षता के मन्त्र को कोई भी हमारे देश की राजनीति में तो नहीं साध सका पर प्रयोगवादी के धनी संगीतकार शंकर-जयकिशन ने उसे सिने गीत-संगीत में अत्यन्त ही संतुलित एवं सहज रूप से क्रियान्वित कर के दिखा दिया. यह एक ऐसा महत्वपूर्ण क्रियान्वयन था जिसे तब मौन रह कर शंकर-जयकिशन ने व्यवहार रूप दे दिया था पर उस उदारवादी कार्य को आज Dr Raajeev Shrivaastav सर ने साक्ष्य के संग यहाँ सिद्ध कर दिया है.
‘फिल्मफ़ेयर’ पुरस्कारों पर शंकर-जयकिशन की श्रेष्ठता भी उनकी विशिष्ठ उपलब्धियों की एक महत्वपूर्ण पूँजी है. जी, विश्व में संगीत के एकमात्र ‘चक्रवर्ती सम्राट’ शंकर-जयकिशन ही हैं.
हार्दिक आभार एवं आत्मिक अभिनन्दन !

Shyam Shankar Sharma ने अर्धांगिनी कुलश्रेष्ठ जी की टिप्पणी पर कहा:
अर्धांगिनी कुलश्रेष्ठ जी, आपने मेरे आलेख् की सराहना कर मुझे कृतार्थ किया है।वस्तुतः में बाल्यकाल से ही उनके संगीत की शक्ति के प्रभाव क्षेत्र में आ गया था,और जब किशोर अवस्था में आया तो मुझे महसूस होने लगा की यह मुझे आनंद देता है।मे उनका नाम पड़कर ही फ़िल्म देखने जाता,उनके गानो को आत्म सात करता और पार्श्व संगीत मे उनकी खूबियों को समझता।में कलात्मक स्वाभाव का था पर घरवालों की इच्छा साइंस पढ़ाने की थी और उस वक़्त माता पिता की अवज्ञा करना आता ही नहीं था,मे अध्यन करता और ख़ाली समय में शरद,बंकिम,तारा शंकर वन्धोंपाध्याय,विमल मित्र,प्रेम चन्द की कृतियों को पड़ता।रेडियो पर गाने सीमित समय पर आते थे उस वक़्त का इंतज़ार करता।वक़्त ने मुझे फॉरेंसिक साइंस में वैज्ञानिक अधिकारी बना दिया और जॉब भी 24 घंटे की होती क्योंकि अपराध का कोई समय नहीं होता।में फ़िल्मो से दूर होता गया किन्तु विज्ञानं की प्रगति ने संगीत की उपलब्धता को आसान बना दिया और शंकर जयकिशन के संगीत से सजे गाने अब असली मजा देने लगे ,उनके संगीत की यही विशेषता है की वो समय से आगे रहते है यही कारण है की वो आज भी जीवंत है। 1912 में सेवानिवृति के बाद जहाँ जहाँ इंसान को वक़्त नहीं गुजरता किन्तु मुझे समय नहीं मिलता,आध्यात्मिक ज्ञान के बाद खाली समय शंकर जयकिशन के संगीत और पोते को पढ़ाने के सहारे आसानी से गुजारकर,एक दो घंटे जब नितांत अकेला होतो हूँ सोशल मीडिया पर गुजारता हूँ इसका मुझे यह लाभ मिला की बचपन की अधूरी प्यास कुछ कुछ तो बुझी और आप जैसी ज्ञानी विभूतियों के संपर्क में आया जिनमे आदरणीय डा.राजीव जी प्रमुख है इनका लेखन,शैलि, शब्द चयन इतना प्रभावशाली है की व्यक्ति अभिव्यक्ति करना भूल जाता है।शंकर जयकिशन पर जो आलेख उन्होंने लिखा वो अदभुद है,आपने उनके लेख के साथ जिस प्रकार जाकर शंकर जयकिशन की उपलब्द्धियों को उजागर किया है वो सचमुच अप्रितम है और उन महा ज्ञानी लोगो की आँखे खोलने को पर्याप्त है जो उनकी सृजन क्षमता का सही आंकलन ही नहीं कर सके कारण ये लोग प्रयोगवादी नहीं अपितु अवसरवादी है? और ज्ञान प्रयोगवादी के पास होता जो समय के साथ और निखरता है।आपका असीम आभार।

Dharma Kirthi जी ने अपने उदगार इन शब्दों में व्यक्त किये :
Shyam Shankarji, Dr.Rajeev Srivastav and Ardhaangini Kulshreshthji…the three of you have taken this discussion on the matchless and timeless genius of Shankar Jaikishan’s work to a philosophical level. I have no words to praise the quality of discussion and precise analytical observations.
One thing, which pleased me no end is the article about SJ’s Secular approach to singers and technicians, at a time when the industry was very sharply divided on parochial lines.
I was planning a detailed write up on this subject as this was bothering me since very young age…say from 1984 to be precise…
This article has strengthened my resolve to do that article, with stronger determination….!
Many thanks to all of you…!!
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लेकिन श्री Bhalchandra Wani जी ने सौ टके की बात की. उन्होने कहा कि :  Scientists might discover another Sun in the universe but there will never be another like the Great SHANKER JAIKISHEN
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“I was also fortunate where the music of my films was concerned. Good songs came my way…” Shammi Kapoor

“I was also fortunate where the music of my films was concerned. Good songs came my way. I asked Shankar-Jaikishen, who were part of my father’s theatre, to give music for Ujala.” The duo then went on to create music for Shammi’s films including Junglee, Janwar, Professor, Raj Kumar, An Evening in Paris, Brahmachari, Prince — right up to Andaz in 1971.”

Courtesyhttp://www.filmfare.com/features/i-have-lived-a-full-life-10919.html

Farhana Farook reproduces one of the last interviews with the swinging buccaneer of the 60s, the late Shammi Kapoor. Here, he handpicks the moments and people who made it a beautiful life
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Farhana Farook

Farhana Farook

Associate Editor

Posted Wed, Oct 21, 2015

 “I have lived a full life”
Shammi Kapoor is a stickler for punctuality and who knows it better than me (I was once refused an interview because I happened to be late). But that does not deter me from meeting him again because at 78, he’s my true blue hero. Undergoing dialysis twice a week hasn’t dulled his stamina for life nor the shimmer in his aqua green eyes. Once bitten twice shy, I reach half an hour early. I wait in his building lobby at Malabar Hill till it’s sharp 5 pm to knock. He’s already waiting for me, just home after a dialysis session. His head covered, he’s silently chanting mantras even as he summons me inside his glass cabin, where an up-to-the-minute Mac and images of his guru coexist. A rollicking affair with stardom, a tryst with technology and an enduring rendezvous with spirituality…Shamsher Raj Kapoor has been there and done that.

He may be in his twilight years but Shammi Kapoor, India’s original ‘Rockstar’ — whose magnetism had flashes of singers Elvis Presley and Cliff Richard — continues to awe actors from Naseeruddin Shah to Aamir Khan. In fact, Aamir vociferously praised the veteran at a recent event and said, “It’s wrong when people say that that Shammi Kapoor is the Elvis Presley of India. I think Elvis is the Shammi Kapoor of America.” Shammi reacts to the compliment saying, “I liked that. Everyone has his own style. One sees a lot of paintings — you like some shades and get inspired by them. It doesn’t mean that you have stolen them,” Shammi says justifying his affinity to the late singer Elvis. “I have no dreams of being known as a great artiste. I have not done the Devdas of my life. But yes, I believe I could give good expression to the songs I was given. I am proud of that.”

The septuagenarian recalls the highpoints in his career. “The success that came with Nasir Hussain’s Tumsa Nahin Dekha (1957) remains one of the most beautiful moments of my life. I achieved it against all odds. I was not only the brother of Raj Kapoor, I was also the son of Prithviraj Kapoor and the husband of Geeta Bali. Also, there was a huge wall created by Dev Anand, Raj Kapoor and Dilip Kumar. To break through this and create a distinct identity was an achievement in itself,” affirms Shammi who went on to exchange the ‘male starlet’ tag for the ‘rebel star’ brand.

It may be recalled that Shammi’s early films including Rail Ka Dibba (Madhubala), Shama Parwana (Suraiya) and Mehbooba (Nalini Jaywant) were lost in the heap of his inconsequential films until a blitzkrieg of hits after Tumsa Nahin Dekha including Nasir Hussain’s Dil Deke Dekho (1959), Subodh Mukherjee’s Junglee (1961) and Goldie’s Teesri Manzil (1966) had women audiences thawing to the boisterous hero.

Shammi credits his success to a host of people. “The first and foremost person I owe my success to is my late wife Geeta Bali (already an established star when Shammi married her in 1955). She was a pillar of strength. She had faith in me and kept saying, ‘You will make it’. And when I did, she was proud and happy.” He continues, “I was also fortunate where the music of my films was concerned. Good songs came my way. I asked Shankar-Jaikishen, who were part of my father’s theatre, to give music for Ujala.” The duo then went on to create music for Shammi’s films including Junglee, Janwar, Professor, Raj Kumar, An Evening in Paris, Brahmachari, Prince — right up to Andaz in 1971.

And while Shammi also credits Vijay Anand for signing him for Teesri Manzil, there’s one name he can never overlook — that of the late singer Mohammed Rafi. Incidentally, the actor and the singer were referred to as a Siamese duo, around which movies were woven. “Without Mohammed Rafi, I would be incomplete. His contribution to my career is immense,” says Shammi. “I used to be present at all the recordings but there were a few occasions when I could not be there. Even then he’d do a great job. I’d ask him, ‘How did you do it?’ He would say, ‘Oye Papa! Maine socha ke Shammi Kapoor yeh gaana kaise karega?  Ek tang aisi phailayega, ek haath aisa phailayega, aithe kudi marega aur aithe pahunchega. Yeh sochkar maine yeh gana gaadiya (Oh Papa! I visualised how Shammi Kapoor would sing this number – he will throw one leg here, one arm there, jump here and reach there – so imagining I sang the song)’!” he laughs.

Winding back, it was the duo who had decided that every time the word ‘taarif’ was heard in the song ‘Taarif karun kya main uski (Kashmir Ki Kali), it would be rendered differently by Rafi and enacted in a different style by Shammi. “O P Nayyar was not keen about the word ‘taarif’ being repeated towards the song’s end. He thought it was boring. Rafisaab reassured Nayyarji that if it didn’t sound nice, we would cut it. ‘Gaanewala main hoon, karnewala woh hai, to phir tumhein kyun taqleef ho rahi hai (I’m the singer, he’s the performer, then why are you bothered)?’ he asked Nayyarji. After the picturisation, Rafisaab hugged me, but Nayyarsaab ne bahut zyaada gale lagaaya (he hugged me tighter),” laughs Shammi.

Also, Shammi had no qualms pairing with debutantes. Barring Kalpana, who couldn’t make headway after Professor, Asha Parekh in Dil Deke Dekho, Saira Banu in Junglee, Sharmila Tagore in Kashmir Ki Kali became huge successes. Shammi says, “I preferred new girls who didn’t create a fuss. It was easier to get work out of them. They worked hard to achieve their dreams, whereas established heroines were more concerned about what was being done for them in the film.”

Swerving towards the two women who anchored his life at different points, Shammi reminisces, “Geeta and I got married at Banganga Temple. We woke up the pujari at 4 am and got the doors of the mandir opened. Then we did the pheras and garlanded each other. She removed a lipstick from her purse and told me to put it as sindoor in her maang. It was a daring moment as we had not informed our families. We were worried how they would react. But they accepted us with love,” About Geeta’s strength he says, “Her sense of maturity was manifest in the fact that she looked after me. I am a difficult person,” he says even as he adds, “Then Neela (the princess of Bhavnagar became Shammi’s second wife) came and took over because in those four to five years after Geeta’s death (she died in 1965 due to small-pox), I had gone berserk. I was like a boat, which had lost its moorings. Neela looked after me and my children. That was another beautiful moment in my life.”

Years later, life once again changed tracks when Shammi embraced  spirituality. The swaggering hero began donning kurtas and wearing the rudrakshamala. “I joined the bandwagon of my guru Shri Shri Haidakhanwale Baba. I did whatever he told me to and went wherever he took me – be it Kedarnath, Badrinath, Gangotri or Jamnotri. I even visited his ashram in Ranikhet. I would even spend Gurupurnima with him in Brindavan. This evolution was necessary. It prepared me for the eventualities of life. Of course I didn’t understand it then. My guru prepared me for the challenging last six years, which I have spent in and out of hospitals,” says Shammi explaining further, “I suffer from renal failure. There’s no cure for it. Dialysis is the treatment. If I stop it, I will die.”

At 78 today, Shammi has no unfulfilled dreams. “I have led a full life. To see my family secure is my main concern. Rab ki meher hai din acche guzar rahe hain (it’s God’s mercy that my days are passing well),” he says.  And what  are the little things that give him big happiness now? “I like to drive to Lonavla and have lunch at the Faryas hotel. I enjoy the Internet. Earlier I would update my site. Today I find it tedious.  I liked uploading digital photos. I also enjoy playing virtual poker,” says Shammi who was one of the foremost Internet users in India.

While ill heath forces him to be seen less, there are phone calls aplenty from the media asking for interviews. “Ha, ha, ha,” he laughs disparagingly, “It’s always nice to be remembered. But I feel it’s more of an obituary. It’s like Kambakht kab chalde, usse pehle usse bulwalein (the wretched one may just pass away someday, so let’s make him talk before that)!” A fatigue seeps into his tone. I do not have the heart to prod him further. I leave him to take a breather. Tomorrow is another day.

1

Shammi’s hit numbers

Yun toh humne lakh haseen — Tumsa Nahin Dekha

Yahoo, chahe koi mujhe — Junglee

Aye gulbadan — Professor

Dil tera deewana hai sanam — Dil Tera Deewana

Baar baar dekho — China Town

Tareef karoon kya uski — Kashmir Ki Kali

Aaja aaja — Teesri Mazil

Aasman se aaya farishta — An Evening In Paris

Aaj kal tere mere pyar ke charche — Bramhachari

“एक वैश्विक (ग्लोबल) संगीतकार बन चुके थे शंकर-जयकिशन” -by Dr. Raajeev Shrivaastav

The First Global Music director duo

The First Global Music director duo

शंकर-जयकिशन ! SHANKAR-JAIKISHAN

हिन्दुस्तानी सिने गीत-संगीत को भारत सहित विश्व के ढेरों देशों के जन मानस के ह्रदय से जोड़ने का प्रथम कार्य करने वाले संगीतकार जोड़े शंकर और जयकिशन वास्तव में सिने संगीत साम्राज्य के अब तक के एक मात्र ‘चक्रवर्ती सम्राट’ हैं. शंकर-जयकिशन के सुरीले गीत-संगीत के ‘अश्वमेघ यज्ञ’ का अश्व जब भारत की सीमा लाँघ कर सुदूर तब के सोवियत रूस की धरती का स्पर्श करता हुआ अमरीका, कनाडा, जर्मनी, फ़्रांस, चीन सहित दक्षिण-पूर्व एशियाई के अनेकों देशों के व्योम की यात्रा करता हुआ इस सृष्टि के दसों दिशाओं में अपने कालजयी सरगम की पताका फहरा रहा था तब किसी भी राष्ट्र का गीत-संगीत उनके सुर-संग्राम को चुनौती देने की स्थिति में नहीं था. आज भी ‘आवारा हूँ’ और ‘मेरा जूता है जापानी’ जैसे उनके अनेकों गीतों की पुनरावृत्ति विश्व के कई देशों की वर्तमान पीढ़ी के अधरों पर सहज रूप से थिरक रही है. भारत के इस एकमात्र सर्वाधिक प्रतिभावान एवं प्रयोगवादी संगीतकार ने पाश्चात्य संगीत वाद्य यन्त्रों का जिस मनोयोग से भारतीयकरण किया उससे तब तो लोग अचम्भित हुए ही थे और आज भी अँग्रेज सहित पश्चिम के सभी संगीतकार उनके वाद्ययन्त्रों पर भारतीय धुनों को सजते हुए देख-सुन कर आश्चर्य से भर उठते हैं. भारत के प्रथम और अब तक के एकमात्र ‘धर्म निरपेक्ष’ (सेक्युलर) संगीतकार शंकर-जयकिशन ही हैं. इस सम्बन्ध में अंग्रेजी में लिखे मेरे पूर्व के आलेख को आप इस लिंक पर पढ़ सकते हैं —-https://www.facebook.com/notes/raaj… जिस अवधि (दौर) में हिन्दी सिने संगीत जगत में आर.के. कैम्प से जन्में और जीवन पर्यन्त इन्हीं के संग जुड़े रहने के शंकर-जयकिशन के संकल्प के समानान्तर जब संगीतकार नौशाद और सचिनदेव बर्मन ने देखा कि शंकर-जयकिशन गायक मुकेश के संग जुड़ कर राजकपूर के लिए धुनें सृजित कर रहे हैं तो पूर्ण सत्य को देखे-परखे बिना ही नौशाद ने मु. रफ़ी को और एस.डी. बर्मन ने किशोर कुमार को अपना स्थायी गायक (पुरुष स्वर) बना लिया. सिनेमा और संगीत के इतिहासवेत्ता (Film & Music Historian) के रूप में अपने शोध एवं अध्यन से मेरा आंकलन तथा निष्कर्ष यह रहा है कि ऐसा कर के नौशाद और एस.डी. बर्मन ने स्वयं अपना और सिने संगीत का अहित किया है. इन दोनों ही संगीतकारों के कई-कई गीत ऐसे हैं जिनमें क्रमशः रफ़ी और किशोर के स्थान पर वे अन्य दूसरे गायक से उसे और प्रभावी रूप में प्रस्तुत कर सकते थे. यदि ये शंकर-जयकिशन की तरह उदारवादी वृत्ति के होते तो सम्भवतः धर्म निरपेक्ष संगीतकारों में इनका भी नाम जुड़ जाता. आवश्यकता पड़ने पर शंकर-जयकिशन ने राजकपूर के लिए मुकेश के स्थान पर मन्ना डे से गवाया है तथा गीतों की प्रकृति के अनुरूप इस जोड़े ने मु. रफ़ी और किशोर कुमार से गीत गवाने में कभी भी परहेज नहीं किया. यहाँ तक की तलत महमूद, हेमन्त कुमार, महेन्द्र कपूर, सुबीर सेन, शमशाद बेग़म, आशा भोसले, शारदा, सुमन कल्याणपुर, मुबारक बेग़म के ढेरों श्रेष्ठ गीत इन्हीं के संगीतबद्ध किये हुए हैं. मु. रफ़ी के गायन में चमत्कारिक सुरीलेपन और ‘याहू’ सरीखा उन्मुक्त प्रभाव उत्पन्न करने का श्रेय तथा किशोर कुमार के ‘उड्लई’ शैली को नूतन प्रभाव देने का श्रेय शंकर-जयकिशन को ही जाता है. ऐसा शंकर-जयकिशन के ‘धर्म निरपेक्ष’ (Secular) उदारवादी मनोवृत्ति के कारण ही सम्भव हो सका था. इसके विपरीत नौशाद और सचिन देव बर्मन ने गायक मुकेश से तो तब गीत गवाना ही बंद कर दिया था. इतिहास साक्षी है कि ये वही संगीतकार हैं जिनके साथ १९४० के दशक में गायक मुकेश ने तब सर्वाधिक लोकप्रिय गीत दिए थे. क्या शंकर-जयकिशन के साथ जुड़ कर मुकेश अछूत हो गए थे ? क्या इसके पार्श्व में कहीं ये मनोविज्ञान तो कार्य नहीं कर रहा था जिसके अन्तर्गत कहावत के रूप में कहा गया है – ‘प्रतिद्वन्दी (शत्रु) का मित्र तो शत्रुवत होता है.’ एक स्थापित संगीतकार को नए-नए आये युवा संगीतकार शंकर-जयकिशन से भय क्यों लगने लगा था ? इन सब के बाद भी गायक मुकेश शंकर-जयकिशन के संग नूतन आयाम स्थापित करते हुए अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के कई-कई गीतों को अपनी मधुर वाणी से सुसज्जित करते रहे. एक वैश्विक (ग्लोबल) संगीतकार बन चुके थे शंकर-जयकिशन. जी हाँ, भारत का ‘ऑस्कर’ कहा जाने वाला ‘फ़िल्मफ़ेयर’ पुरस्कार किसी एक श्रेणी और विधा में सर्वाधिक बार अर्जित करने वाले संगीतकार भी शंकर-जयकिशन ही तो हैं. सुरों के अद्भुत चितेरे इस संगीतकार की अपूर्व प्रेरणा ने ही मुझे उन पर एक कविता रचने का सौभाग्य प्रदान किया जिसे मैंने सर्वप्रथम भाई Sudarshan Pandey जी के संग साझा किया था. शंकर-जयकिशन पर लिखी गयी मेरी कविता जो उन्हीं के द्वारा रची गयी एक धुन पर आधारित है को आप सभी इस लिंक पर पढ़ सकते हैं —- https://www.facebook.com/notes/raaj… आज यह सिद्ध हो चुका है की महान शंकर-जयकिशन विगत, वर्तमान और आगत के एकमात्र स्वयम्भू कालजयी संगीतकार हैं. मंगल कामनाएं ! डॉ. राजीव श्रीवास्तव Dr Raajeev Shrivaastav
NB:
भाई Sudarshan Pandey जी,
महान शंकर-जयकिशन पर प्रस्तुत आलेख आपके मन को प्रसन्न कर सका, आभार !
अभी भी संगीत के इस ‘चक्रवर्ती सम्राट’ के ढेरों आयाम ऐसे हैं जिस पर अभी तक किसी का ध्यान नहीं गया है. उन सब को एक साथ प्रस्तुत करना सम्भव नहीं है फिर भी एक-एक करके उन पर प्रकाश डालता रहूँगा.
अभी एक आलेख गायक मु. रफ़ी पर लिख रहा हूँ जो दिसम्बर में उन पर प्रकाशित होने वाली पुस्तक के लिए है, इस आलेख में भी इस महान संगीतकार की चर्चा महत्वपूर्ण सन्दर्भ में की जा रही है.
वास्तव में शंकर-जयकिशन के प्रयोगवादी होने की उनकी विशेषता ने ही उन्हें भारत के एकमात्र ‘प्रगतिशील’ संगीतकार के रूप में भी स्थापित किया है. संगीत में परम्परागत रुढियों को तोड़ने का साहस दिखाते हुए इस जोड़े ने आधुनिकता को उसके नग्न रूप में नहीं अपितु सर्वथा नूतन आवरण के संग प्रस्तुत किया है जो देह और आत्मा दोनों को ही तृप्ति प्रदान करता है.
अभी तो बस इतना ही, नहीं तो यह ‘प्रतिक्रिया’ भी एक आलेख का रूप ले लेगी.
पुनः आभार !

Miya Barsat ke mausiqi ne tumhare Andaaz ko dho diya

By

Dharma Kirthi

Sumadhur Shubhoday Saathiyon..!!!

Today I am sharing some interesting information about Shankar Jaikishan, which may not be very new, but, important all the same.

Their very first movie was record breaking , is an understatement. Barsat was released in the same year as Mahboob Khan’s Andaaz and by the time Barsat was released Andaaz was a huge success, musically and box office as well.

But once Barsat hit the screens, Andaaz was lost; such was the impact, that Mahboob Khan himself remarked to Naushad, “Miya Barsat ke mausici ne tumhare Andaaz ko dho diya“. This remark by Mahboob Khan , hit Naushad very deeply. Till then Naushad was the be all and end all of Hindi cinema, and was there for ages. Known to be a great Ustad of Hindustani Music..

Barsat’s music as we all know was path breaking,and new every which way.Rich in orchestra, out of the box composition, which no one could type cast in a limited mold. Every song had a new feel , western symphony style orchestra, tunes very native in feel and rhythm Indian..pace energetic. In all a novel experience, which took the listeners and pundits by storm.

The as , it happens whenever you see a new kid on the block, there is always that analysis, about their strengths etc. so they were branded as a flash in the pan, lacking traditional strength etc..

Few years later, 7 to be precise, Bharat Bhushan and his friends planned to make Basant Bahar, and signed Anil Biswas, another doyen of music those days. Financiers refused to accept Anil Biswas. They approached Naushad, who refused saying, no one can ever re create another Baiju Bawra..not even himself.

At this stage Chandrashekhar, actor and friend of Shankar , who was associated with the making of Basant Bahar, approached Shankar, and told him the developments. Shankar, instantly accepted the challenge thrown by Naushad in his refusal..and agreed to take up with remuneration not being an issue, despite the fact, that they were already big names.

The story of Basant Bahar is based on the Kannada novel “Hamsageethe” by legendary novelist Tarasu. “Hamasa” means swan and “Geethe” means song. It is believed that before a swan dies,it will sing without opening its mouth. That mutter of melody is believed to be unmatched since any scene of lyricism falls short of its reach.( courtesy Wiki)

With such an interesting subject and an existing challenge , SJ, rose to the occasion and scored a music which till date is unheard of. Every frame, right from the title music, which is a title song in chorus..to the last number, duniya na bhaye mohe ab to bulaale.. music is divine, an offering to Maa Saraswati..

SJ, made sure that purity of classical music and tunes was maintained for their compositions, and used the skills of masters like Pt Pannalal Ghosh the Flute maestro , and Pt Bhimsen Joshi..a vocalist par excellence..and Nikhil Bannerjee a master Sitar player…!

This album, shut the critics up. Their mastery on every genre was established beyond doubt. I guess, SJ must remain grateful to Naushad for his challenge, which brought out the best in them.

1956, the year I am born, happens to be a landmark year for SJ’s career. They had 7 releases , starting with Basant Bahar, Chori Chori, Halaku, Kismat ka Khel, New Delhi, Patrani and Rajhat. Can any composer ever give such a series of hit tracks..in one year. Chori Chori went on to win them their first Filmfare Award. Had some of these movies released in different years, quite a few of them would have won the award. That they competed with their own work is evident in this list of movies.

Each of the above movies had a different genre and SJ excelled in each of them. Such was their authority and command over music for films. Always , dong full justice to the story and period.

I can go on and on.. but, will now let you enjoy this masterpiece composition, by Pt Bhimsen Joshi and Manna Dey.. I wish some of our knowledgeable members throw light on the raagas etc..

ENJOY!!!

Comments
Sapna Malhotra
Sapna Malhotra Excellent write up….wow..i did’nt know all this….

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Sheema Shailendra
Sheema Shailendra Great write up Dharma.

Unlike · Reply · 2 · 13 hrs
Lakshmi Kanta Tummala
Lakshmi Kanta Tummala Thank you, Dharma, for the post. I am always eager to read your write ups which make the post all the more interesting.

Like · Reply · 1 · 13 hrs
Dharma Kirthi
Dharma Kirthi Thank you Sapnaji and Sheema ji.!

Like · Reply · 1 · 13 hrs
Nandlal Bajaj
Nandlal Bajaj Very good and knowledgeing article on the jadugars of Sangeet.Very well written Sirji.

Dharma Kirthi
Dharma Kirthi My pleasure Lakshmi. Your appreciation makes me do better..!

Like · Reply · 1 · 13 hrs · Edited
Dharma Kirthi
Dharma Kirthi Thank you Nandlalji.!

M.k. Rajkapoor
M.k. Rajkapoor Classic,classic & Classic,Tnx for post,Dharmaji.

Like · Reply · 1 · 12 hrs
Dharma Kirthi
Dharma Kirthi My pleasure M.k. Rajkapoorji…!-

Ajay Dagaonkar
Ajay Dagaonkar The tough gets going when going is tough
The philosophy of Shankar was “he accepted no competition “
And Jaikishan ” He accepted no superiority “
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Like · Reply · 2 · 12 hrs · Edited
Kashmir S Rai
Kashmir S Rai Brilliant

Dharma Kirthi
Dharma Kirthi Thank you Kashmir!!

Like · Reply · 1 · 12 hrs
Rajan Bedke
Rajan Bedke Gr8 preface & song

Like · Reply · 1 · 11 hrs
Dharma Kirthi
Dharma Kirthi Thank you Rajan!

Like · Reply · 1 · 10 hrs
Taiyeb Shaikh
Taiyeb Shaikh Wonderful write up Dharma. Thank you & wish you great weekend.

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Dharma Kirthi
Dharma Kirthi Thank you Taiyeb! You too have a great weekend…

Taiyeb Shaikh
Taiyeb Shaikh Ajay Dagaonkar ji great post. Both Shankar & Jaikishen were great humans too. Competition may create jealousy & Superiority might bring egoism. So they were perfect professionals. Hats off to SJ. Thanks for great post. Have a great weekend.

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Harishchandra Patil
Harishchandra Patil Dharma great post. Just a note to add. They also used Nikhil Banerjee for Sitar. Another Maestro.

Like · Reply · 1 · 10 hrs
Dharma Kirthi
Dharma Kirthi Thank you Harishchandra, for that addition….I will edit the post..!

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Vivek Shirali
Vivek Shirali Wow,Dharmaji!Absolute peach of a post!Huge Salute and as Ajay Sir superbly says,’tough gets going if going gets tough’is indeed true in case of SJ!

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Dharma Kirthi
Dharma Kirthi Thank you Vivekji, for your generous appreciation…!

Rajan Shah
Rajan Shah Dharma Kirthiji. Thanks for the great information. This song is in the raag Basant, which cannot be sung without proper riyaz and you need deep knowledge of indian raaga to render this. Initially Manna saab refused to sing this song with Pandit Bhimsen as Bhimsenji was a trained classical singer. But it was on the insistence of Shankarji that Manna saab obliged and the song went on to be termed as Iconic.

Like · Reply · 3 · 7 hrs
Dharma Kirthi
Dharma Kirthi Thank you Rajanji for your appreciation and sharing the information on the raaga and story behind Manna da…being reluctant to sing..it was not only Shankarji who convinced him but, Manna da’s wife also pushed him..
Manna da had two objections…one is singing with Pt Bhimsen ji and the second one is defeating Panditji in the song…which he refused to accept..

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Ashok Shah
Ashok Shah Very well written this song is a diamond in Indian classic songs

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Dharma Kirthi
Dharma Kirthi Thank you Ashok ji…!!

Hemantkumar Pawar
Hemantkumar Pawar Again a very nice write-up, this time on a classical number from Basant Bahar, a hit film of its period and still remembered for its classical music.
The music and all compositions in this film created history in another context.
Seven years prior to i
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Dharma Kirthi
Dharma Kirthi That’s an excellent critique on evaluation of classical music in Hindi cinema.
I agree with you about Baiju Bawra being an overrated album in this genre..when some other classic Jhanak Jhanak Payal Baje…not getting its due…and over a period of tim
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Hemantkumar Pawar
Hemantkumar Pawar Dada, I am very much humbled now !
I sure will participate regularly, no doubt !!
About Zanak Zanak Payal Baje, I have always felt a gross injustice has been done to shantaram bapu by the film and music critics of all times !!!

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Dharma Kirthi
Dharma Kirthi It will indeed be great if you post such, write ups as fresh posts..they will have larger reach… Please do that.. Hemantkumarji

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Rajan Shah
Rajan Shah Hemantkumar Pawarji. Thanks for he great article. I agree jhanak jhanak payal released in 1955 had some great songs composed by the grossly underrated composer Shri Vasant Desai. He was a man proficent in classical music. A very unassuming softspoken down to earth man, he never got his due.

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Harishchandra Patil
Harishchandra Patil Dharma this is great post.
The jugalbandi is on raga Basant Bahar and it is performed in screen by
Parshuram Sanas a old timer actor from Prabhat films. Rest are already known.
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Hemantkumar Pawar
Hemantkumar Pawar Yes Dharma da, bilkul !
I will do whatever I can !!

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Shyam Shankar Sharma
Shyam Shankar Sharma धर्मा जी जब भी बैजू बावरा का जिक्र होता है,बसंत बहार सामने आ खड़ी होती है और मुझे यह कहने से परहेज भी नहीं कि कि बसंत बहार जैसी शास्त्रीय संगीत फ़िल्म रजत पटल पर फिर कभी अवतरित नहीं हुई।नवरात्र चल रहे है सारा हिंदुस्तान माँ की भक्ति में डूबा है,अगर यहाँ इस फ़िल्म का एक भजन” भय भंजना वंदना सुन हमारी दरश तेरे मांगे ये तेरा पुजारी ” सुनकर दो देखो माँ में खो जाओगे, ऐसा सूंदर शास्त्रीय भजन आज तक नहीं बना और उस पर मन्ना डे का अद्भुत आलाप जो ऊंचाई प्राप्त करता है उस तक पहुंचना अन्य किसी गायक के बस की बात नहीं,शंकर जयकिशन फूल की सुगंध के पारखी थे तो हंसनी के प्यार की भी पहचान भी जानते थे।मेहबूब साहिब जान चुके थे की इस जोड़ी के पास विविधताओं के सागर है और नौशाद के पास सीमित दायरा है और इस महान संगीतकार को महानतम संगीतकार के सामने पसीना बहाना पड़ेगा और ये हुआ भी शंकर जयकिशन देखते ही देखते उनसे कही आगे निकल गए, यह स्वस्थ स्पर्धा थी।नौशाद साहिब को पीड़ा पहुंचना स्वाभविक था क्यू कि वो स्वयं को शास्त्रीय संगीत का एकमात्र ज्ञात समझते थे और उनका भ्रम बसंत बहार ने तो खंड खंड कर दिया। बहुत उत्तम आलेख् धर्मा जी ,इतना अच्छा विवरण आप इसमे दे चुके है की इस पर कुछ लिखना शेष ही नहीं रहा।बसंत बहार शास्त्रीय संगीत के दिग्गजो की फ़िल्म थी जिसे शंकर जयकिशन ने विनम्र चुनोती के साथ स्वीकारा और प्रतिद्वंदी को आसानी से परास्त कर दिया। उक्त गीत पंडित भीमसेन जोशी और मन्ना डे को ऐतिहासिक बना गया। सादर आभार।

Sudarshan Pandey
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Shanker Jaikishen’s Songs with background explanation & stories

Posted by

Lakshmi Kanta Tummala

Dear friends,
I am happy to announce a special music event organized by our very ownHarishchandra Patil. For all those who don’t know him, Harish is a movie lover who has a deep knowledge of it. He will be glad to hold these informal events at members’ requests if a venue is provided.

Following is his take on some of SJ’s greatest songs:

Shankar Jaikishan 18th October 2015

1. Barsaat mein humse mile– Raj Kapoor first film with SJ was a great success and top grosser in 1949.
Raj heard on the sets of Andaz about the great young talent of Lata and Sent Jaikishan to her house. She came to Raj and agreed to sing for his films and explained even Raj Kapoor’s office boys are so handsome. ( Jaikishan)
the team of Raj was then formed with Shankar, Jaikishan, Hasrat, Shailendra and Dattaram
Later in 1952. Sebastian joined SJ team. Alos Goody Seervai as piano accordionist.
Waves of Danube by Romanian composer of 1880. Ivanovici , A Anniversary waltz
Ram Ganguly was the MD before SJ and had recorded couple of songs too. But Raj Removed him on the pretext of using the same tune for another film. He then gave free hand to SJ
Song composed on Raga Bhairavi.

2. Ghar Aya Mera Pardesi– Awara- This film truly launched SJ and RK in the international scene. Countries like Russia, China, Turkey, Azerbaijan, turkmenistan, Kazakhstan, Armenia, Egypt Libya Jordan etc went crazy over these songs.
Great Dream sequence. probably drew inspiration from 1927 film Metropolis by Fritz Lang.
Demon taken from Silvester Dali’s bizarre drawing in Alfred hitchcock’s “spellbound” 1945.
KN Singh ( his foster father) is portrayed here as Demon from whom Raj is trying to escape.
Refer- Lala Gangawane story after this on Dholak’. Reference to suggester, Sumant Raj.
Refer- Mandolin of David as the start of Ghar Aya mera pardesi with rows of musicians supporting David with cowbells.
Raga Bhairavi.

3 Unse Pyar ho gaya– Badal-Producer Bhagwandas Verma became regular with SJ as Verma Production. Director Amiya Chakravarty of Jwar Bhata, Daag, Patita,Seema, Kathputli etc.
All songs were a great hit. This film was based on Exploits of Robin Hood.
Ebullient Madhubala dance sequence.
4. O Madhur Milan Hai Sajana– Kali ghata- Producer, actor and Director Kishore Sahu’s film.
Debutant Bina Rai and Asha Mathur who later became Mohan Saigal’s wife.
Rafi and Lata score.
5. Tune haay mere Zakhme jigar– Nagina- Nutan and Nasir Khan starrer.Dalsukh Pancholi’s film. one of the noted feature is SJ did not have chance to record KL Saigal as he has passed away in 1946. but SJ recorded three beautiful songs of C H Atma who singing was styled on Saigal.
Tune haye mere was very popular song but Nutan could not watch it as she was under age eighteen and the filmed was certified as adult film due to some scary scenes in the movie.

6.Koi Nahi Mera- Daag- Again Amiya Chakravarty direction film. SJ First film with Dilip Kumar.Talat;s mellifluous singing under SJ truly accentuated Dilip performance of an alcoholic, which won him filmfare award.

7.Hay mera dil– Parbat- Premnath and Nutan starrer film which did not do well at box office but all the songs won the hearts music lovers.

8. O Bhole balma O more Sajna- Poonam- Ashok Kumar- Kamini Kaushal starrer.
See how Lata’s voice was used as instrument by SJ–after the words Ghunghru baje Cham Cham. Lata Literally fainted after the recording of this songs at HMV studio due overwhelming emotions.

9. Sunte te naam hum- Aah- Vijayalaxmi- A very beautiful number of Lata with great piano accordion by Goody Seervai. Vijayalaxmi the enchantress, Raj Kapoor looking so passionately and desirously at her which he was not looking at Nargis also.
Some people say that “ Come September” song was taken from this tune.
Dubbed tamil also.See backup files.
This songs is also in Raga bhairavi.

10. Naino se nain hue char– Aurat- Again a bhagwandas Verma film- A super Box office hit firm.
Starring Premnath and Bina Rai / This song is filmed on Beautiful actress Purnima who married bhagwandas verma.Purnima’s father was Tamil brahmin but Purnima’s mother was from North Indian Muslim family. Played supporting role in many films.
Aunt of Mahesh Bhatt and grand mother on Imran Hashmi.Very Good Flute and great Accordion Play in this song.

11. Hain Sabse Madhur woh Geet – Patita- “ Our sweetest songs are those which tell our saddest thoughts”. Shelly’s famous words which are aptly reflected by Shailendra in this song.
All songs from This film became very famous and especially “ Kisi ne apna banake mujhko” was so sweetly sung by Lata that Shankar gave her hundred rupee note after the recording.
Excellent rendition by Talat Mehmood.

12. Aa neele Gagan tale pyar hum karen– Badshah- Lata and Hemant Kumar- This song is an astoundingly pleasant expression of Raga Bhimpalasi. Such A lover’s song that it creates goosebumps for the listeners/ viewer even today.This songs has very subtle interplays of violin and accordion.

13. Mohabbat ki dastan – Mayur Pankh- Again a Kishore Sahu Production. Though Sumitra Devi was a heroin in this film, Asha Mathur acted as Mumtaj for this song.
Helen made a debut in this film along with Cuckoo. Post 1961 film Junglee, SJ increased male singers in their films otherwise earlier films were female dominated songs. for example each of nine nine songs in Aurat and Poonam were sung by lata.
again Raag Bhairavi ruled in the film as music saved this film from flop.

14. Tu Pyar ka sagar hai-÷ Seema- even the sternest critics applauded Nutan’s role in this film as career best performance.This won a filmfare award. Ustad Ali Akbar khan played Sarod for this film. He did so only after ensuring that Shankar himself is quite adept at playing Sarod.
The introduction of Sarod in the song “ Suno chhoti si gudiya ki” was Shankar’s brain child.
The song is in Raga Darbari Kanada and the use of Church Organ.

15. Ramaiya Vastavaiya– The 1953 film “ Aah” had flopped at box office and Raj Kapoor sensed it the the film’s Delhi premier. He was immediately looking for hit film. He then drove to the house of K.A.Abbas for good script.
when KA returned to Bombay, Raj got a fabulous script.Raj bought the script at a price which wiped of all the debts is KA.
As soon as Raj got the script , he summoned his entire team to RK Studio and shared with all. In that night the format of all the nine songs of the film were finalized.
This song has Rafi, Lata and Mukesh comes in the third antara.

16. Ketaki Gulab juhi– Basant bahar- SJ hit a goldmine of their career with Basant Bahar. This Bharat Bhushan’s own production. The music of this filmed surpassed even the other musicals like Baiju Bawara, Jhanak Jhanak Payal Baje, Tansen etc in their popularity and critique acclaim.
A serious Raga like “ Des” was Presented very sweetly in one of the great duet “ Nain mile chain kahan” The song “ Ketaki “ was a jugalbandi .with Bharat Ratna Pandit Bhimsen Joshi & Manna Dey. This was in Raag Basant Bahar. Manna dey was so overwhelmed by this duet that he took special training under Ustad Rahman Khan for this song. Incidentally this film had excellent rendition by Pannalal Ghosh on flute is various songs.

17. Aaja Sanam– Chori Chori- The year 1956 was one of the best tears for SJ, with the variety and quality of their musical composition in seven films. Raj and Nargis won their first filmfare award for this film. This songs has exhilarating use of accordion pieces.
AVM boss learning that this song is sung by Lata and Manna in the recording studio, he wanted to cancel the recording of the cong as he wanted Mukesh and Lata to sing the song. Raj intervened and the song was recorded, and the AVM boss apologized.

18. Nakhrewali– New Delhi- Mohan Saigal’s film appealing for national integration.
First time SJ were with Kishore Kumar. Songs dominated by Lata and Kishore were hit. Especially this song with great use of trumpet and Tap Dance Rhythm. The song “ Murli Bairan Bhayi” was created by Jaikishan after hearing his sister Maniben humming a particular tune.
A beautiful song “ Koi mere sapno “ was deleted from film as actress jabeen jalil could not match dance steps with Vaijayantimala.

19. Kabhi to aa –Patrani- Another classical music film starring Pradeep Kumar and V’ Mala.
again all female songs. with song sung by Mangeshkar sisters Lata, Meena, Usha.
This film had songs based on kathak dance and shankar was himself very adept at this dance type, Ustad Ali Akbar Khan also played Sarod in this movie for song “ Chandrama kyun mad bhare badal mein” . reminds of “ mere naina sawan bhadon of after years. Raga Kirwani.
This song is in Raga Bhairavi.

20. Aaye bahar ban ke– Rajhat- The only song sung by Mohammad Rafi in this film.
Sohrab modi film production with beautiful Madhubala’s sterling performance.
This song is based on Raga, Bageshree.

21. Aye pyase dil Bezuban– Begunah- This songs can easily be termed a greatest song of Mukesh. This was picturised on Jaikishan himself. Kishore Kumar and Shakila were main leads in this film.
Filmed copied from “ Knock of the Woods” a Danny Kaye Starrer film.
There a big demand for the copy of the film and at least video songs
Songs based on Raga Bhairavi with Shuddha Rishabh as variation.

22. Manzil wohi hai pyar ki– Kathputli- Singer Subir Sen had a voice similar to Hemant Kumar. A very young Subir Sen used to go around to various music directors in 50’s for opportunity to sing. However he was given this break by SJ. He was just 14 years of age at that time.
Director of the film, Amiya Chakravarty died of heart attack during the making of this songs. Director Nitin Bose then took over and completed the song and the rest of the movie.
Great Piano and accordion performances in this songs..
Raga Kirwani.

23. Ye mera diwanapan hai– Yahudi- Dilip Kumar, Meena Kumari and Sohrab Modi starred film based on drama “ Yahudi ki Ladki”. It is said that While resting on his bed, Shankar got this tune and immediately Shailendra wrote the lyrics for him. Initially nobody thought Mukesh for this song. Mukesh was on the backseat those days due to failure in film production. He was very much in need of work. When Talat came to know about this, he insisted that Mukesh should be given opportunity to sing this song.Even Dilip Kumar had to be convinced that instead of Talat , mukesh should get this song

24. Dil Ki Nazar se. – Anari- 1959- A very soulful duet of Lata and Mukesh. There were many first for this movie. filmfare awards for best singer- Mukesh, best Actor – Raj- Best MD- SJ and Best Lyricist- shailendra ( incidentally filmfare award started for lyricist from this year).
This was also Hrishikesh Mukherjee’s first film as director.

25. Kahe jhoom jhoom raat yeh suhani– Love Marriage- Subodh Mukherjee production. After the success of Munimji and Paying guest, Subodh considered Dev Anand as lucky for his his films.
It is in the grapevines that OP success in fifties was based upon very highly westernized and peppy tunes that took him amongst top composers.
But SJ composed a tune sung by Rafi and written by Shailendra as,
tin kanastar, peet peet kar gala fad kar chillana” with following lines

“Idhar se lekar udhar jama kar, kab tak am chalaoge”

This song for today is again on Raga Bhairavi

26. Hum matwale naujawan– Shararat- While Kishore kumar sang four songs on this film, two songs were sung by Rafi for Kishore the actor. this was also due to Kishore had lot of trouble due to income tax authorities and producers and MDs were not sure if Kishor will appear for the recording of the song..

27.Matwali Naar thumak– Ek Phool Char Kante- Great dance by Waheeda Rehman- A prelude of music and dance 2.14 minutes till mukesh chips in with voice.

28. Hai aag hamare seene mein– songs sung by Lata, Geeta, Manna Dey, Mukesh and Mahendra Kapoor. This was a third song Pran sang a villain in the film.1. Jise Dhoondti hai meri nazar in 1950 film, Sheesh Mahal, then 1955 Munimji with Dil ki umange hain jawan.
Initially SJ were not ready to do this film as the story was based on dacoits of Chambal. But Raj made sure that this was a great musical. in this film. SJ used some of the earlier background tunes. for eg. background score of the climax scene of Awara was brilliantly used in “ O basanti pawan paagal” with Raga basant Mukhari”

29. Tera mera pyar amar– Musical Romance of Sadhana and Dev anand. excellent cinematography of the songs as well beautiful Sadhana. Lata,Shailendra, SJ and Hrishikesh Mukherjee combine. Excellent Accordion pieces in the interlude
Watch Sadhana at .33 to 036. she make one speechless with her beauty.

30. Yaad na jaye beete dino ki– Dil ek Mandir.
Director shreedhar completed the whole film in 21 days. and SJ responded with the challenge of completing the all the eight songs in less than a week. Great use of church organ and the song is based on raga Kirwani.

31. O mere sanam o mere sanam- Sangam– The great duet by Lata and Mukesh
Jo Beet Gaya Ek Sapna Tha , Yeh Dharti Hai Insaano Ki , Kuch aur nahin insaan hai hum , ik dil ke do armaan hai hum ….O mere sanam .. a supreme act of asking for forgiveness and showing the frailty of our human nature – we all make mistakes in love and life ..- so brilliantly written by Shailendra smile emoticon and so sublimely acted by Vyjayanthimala with such passion and sadness at the same time.

32. Mein piya teri tu mane ya na mane–Basant Bahar- Finally a classic Bhairavi
Lata sings and on flute is Pannalal Ghosh. It appears that both sing together is the magic of this Bhairavi.
the combo of Pt.Pannalal Ghosh, Ustad Allah Rakha on tabla and Shri Nikhil Banerjee on sitar

Thank you,
Harishchandra

Harishchandra Patil

Do din ke liye mehmaan yahaan – Badal(1951)

By Sapna Malhotra

Sapna Malhotra

My pick of the day is this melanocholic song from badal…this was probably the first of the assignments of s.j away from.raj kapoor…with barsaat and then awara under their belt..the critics were of the opinion at that time ..that it was the genious of raj kapoor’s musical knowledge..that was translated in their work…but with baadal s.j finally proved their mettle…the numbers they churned out for this robin hood type of movie..were to set a benchmark for the forth coming movies through the fifties…1951 ..i have often felt was an iconic year as it established the film industry in actual terms as well as shaped the stars who then went on to become the stars with their trademark…raj kapoor with awaara..created this simpleton image..dev anand who until then..hardly had been noticed formed navketan and baazi gave him.his city smart debonair image…nargis and dilip kumar already were firmly placed..but madhubala created a stir with badal..tarana..lataji finally established herself as the sweetest singer to have walked on this planet..with the songs she sang in.1951… her cloak of noorjehan was now discarded..and she came up with such masterpieces…burman da.with thandi hawaayen..frm naujawan..tum na jaane kis jehan in sazaa.a.anil da had lata’s sweetest songs…man mein kisi ki preet basa le..araam..and all songs of tarana…roshan came up with malhaar…bade armaano se rakha hai balam …c.ramchandra had albela…the genious of sajjad hussain had saiyaan.. all songs ..lataji’s master renditions and then hulchul…aaj mere naseeb ne mujhko rula rula diya…it is amid this galaxy of masterpieces..that the duo of shankar jaikishan came with such melodious songs of all emotions in badal..just listen to the delightful duet..ae dil.na mujhse chupa..sach bata kya huya..lata’s dancing ringing solo..unse pyar ho gaya…and the sorrowful..rota hai mera dil.. same year they also gave music in nageena..tune ..haaye mere zakhme jigar ko chu liya…in both these movies they made lata sing in a higher note…barsaat and awara songs were in a much lower notes..lataji soared with these vocal notes that they set for her…

Comments
Dharma Kirthi
 What a beautiful write up, tracing the evolution of SJ’s music, and the then prevalent composers…and their quality.
Excellent, post Sapnaji…look for more such interesting ones..with great choice of songs…
Thank you…!!

Sapna Malhotra
 Thank you so much…
Sapna Malhotra
 And just listen to the lyrics of shailendra..” duniya mein savera hone laga..is dil mein andhera hone..har zakhm sisak kar rone laga..kis muhn se kahe qatil hai kaha…the preluding aalaap..in higher notes..and following with excellent orchestration..when there used to be three stanzas..the middle one usually had a slightly diffrnt tune..inmost of the fifties…many music directors followed this trend..
Dharma Kirthi
Dharma Kirthi Excellent observation Sapnaji…!! I am sure you love these songs very dearly…and have a great ear for both music and lyrics….keep sharing your perspective of songs….
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