अभी तक के इतिहास में सबसे लोकप्रिय संगीतकार हैं  शंकर जयकिशन

* अभ्युदय राजीव केलकर

shailendra+sjsjrajendranathदरअसल 1950 से 1970 के बीच का समय हिंदी फिल्म संगीत का स्वर्णयुग कहलाता है. ये वो ज़माना था जब यो-यो हनी सिंह जैसे फूहड़ संगीतकारों ने भी स्तरीय संगीत दिया. इसका मुख्य कारण था संगीतमय वातावरण और फिल्मों में मार-पीट, भाषणबाज़ी और अश्लीलता की जगह संगीत को प्राथमिकता. इस युग में बने कई गाने आज दशकों बाद भी अपनी मिठास के कारण बजाये, सुने और सराहे जाते हैं. चाहे वो रेडियो-मिर्ची हो या स्टेज शो या ऑडिशन हो, अधिकतर इन्हीं गानों को चुना जाता है.

इस संगीतमय वातावरण को बनाने में एक अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभायी शंकर जयकिशन ने. उस ज़माने के लोग ही जानते हैं कि जो लोकप्रियता और बुलन्दियाँ उन्होंने अपने अविस्मरणीय संगीत के बलबूते पर हासिल की वो ए.आर. रेहमान साहब ऑस्कर की टोकरी लाकर भी नहीं कर सके. अभी तक के इतिहास में शंकर जयकिशन शायद सबसे लोकप्रिय संगीतकार हैं, जिनका उस समय के बड़े बड़े नेताओं-अभिनेताओं से ज़्यादा रुतबा था.

उनका संगीत आज भी प्रासंगिक है. इसका प्रमाण है – आप कोई भी दस पुराने गाने याद कीजिये, उसमें 2-3 शंकर-जयकिशन के निकल ही आयेंगे. 2 – 3 दिन में एक न एक बार आपका उनके गानों से पाला पड़ ही जाता है. राज कपूर, राजेंद्र कुमार और शम्मी कपूर के अधिकांश हिट गाने इन्हीं के बनाये हुए हैं. उसके अलावा “सौ साल पहले मुझे तुमसे प्यार था” या “ज़िन्दगी एक सफर है सुहाना” या “तू प्यार का सागर है” या “याद किया दिल ने कहाँ हो तुम”, इनके सदाबहार गानों की फेहरिस्त (लिस्ट) लम्बी है और काफी लम्बे समय तक चलती रही. ये गाने सुनने में जितने मीठे होते थे , गाने-बजने में उतने ही सुगम और आनंददायक.

हमारा प्रयास यह है कि हमारे “सुरूर”-प्रेमी युवाओं को इससे अवगत कराया जाये और उन्हें ये समझाया जाये कि नाक से या गिटार पकड़कर गला दबाकर “तेरी ज़ुल्फ़ें …. तेरी बाहों में” रेंकने को ही संगीत नहीं कहते. डालडे का नकलीपन कभी खालिस घी के स्वाद को नहीं पछाड़ सकता. पंचम-दा और माफियार रेहमान जी के भक्तों द्वारा गुमराह युवाओं को ये समझाया जाये कि संगीत स्वर-वाद्यों से निकलता है, झाड़ियों को हिलाने से या पानी की आवाज़ से या लकड़ी को पीटने से नहीं.

कम से कम हमारे युवा साथियों को पता तो चले कि मीठे पानी की झील क्या है और दलदल क्या है. इसलिए हमारा मिशन है शंकर जयकिशन के संगीत को अभी के लिए और भावी पीढ़ियों के लिए संजो कर रखना और उसका प्रचार करना और फलस्वरूप संगीतमय वातावरण का निर्माण करना.

धन्यवाद